by Satsvarupa dasa Goswami
श्रील प्रभुपाद ने अपना पूरा जीवन कृष्णभावनामृत के प्रचार की तैयारी में समर्पित किया। 1965 के बाद उन्होंने ISKCON की स्थापना कर अपने ग्रंथों, शिक्षाओं और शिष्यों के माध्यम से पूरे विश्व में कृष्णभक्ति का संदेश फैलाया।
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